Rise & Fall of Yamaha RX100 Motorcycle History | यामाहा RX100 मोटरसाइकिल इतिहास का उदय और पतन

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दोस्तों हमारे देश भारत में अब तक 100 से भी ज्यादा बाइक्स लॉन्च हो चुकी हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ कुछ ही गिनी चुनी बाइक्स ऐसी हैं जो कि लोगों को हमेशा याद रहती हैं और आज के इस Article में हम आपको ऐसे ही एक स्पेशल बाइक की स्टोरी बताने वाले हैं जो कि नाइंटीज के दौर में हर एक यंग इंडियन के दिल की धड़कन हुआ करती थी। 

दरअसल हम बात कर रहे हैं उस Yamaha आर्थिक संकट के बारे में जिसे आज भी भारत की सबसे फेमस व सबसे कामयाब बाइक्स में शुमार किया जाता है क्योंकि आज मार्केट में जिस तरह का क्रेज रॉयल एनफील्ड बाइक्स के लिए देखने को मिलता है। 

नाइंटीज के दौरान ठीक वैसा ही क्रेज आर्थिक संकट के लिए भी हुआ करता था। यहां तक कि चोर और गुण्डे भी इसके स्पीड और परफॉर्मेंस की वजह से क्राइम करने के लिए इसी बाइक का ही यूज किया करती थी। 

लेकिन फिर सवाल ये उठता है कि ये बाइक्स अगर इतनी ही ज्यादा सक्सेसफुल थी तो फिर कंपनी ने इसका प्रोडक्शन सिर्फ 11 सालों में ही क्यों बंद कर दिया और इंडियन रोड पर राज करने वाली ये बाइक्स अचानक सड़कों से गायब कैसे हो गई। 

तो फिर चलिए Yamaha आर्थिक संकट के रायसन फॉल की इस इंट्रस्टिंग स्टोरी को हम शुरू करते हैं। तो दोस्तो जैसा कि हम सभी जानते हैं कि जापान की कंपनी Yamaha हमेशा से ही हाई परफॉर्मेंस बाइक्स बनाने के लिए फेमस रही है और यही वजह है कि आज भी इंडियन मार्केट में Yamaha की कई सारी ऐसी बाइक्स मौजूद हैं जो कि लोगों के बीच में काफी ज्यादा डिमांड में रहती है। 

लेकिन आज के टाइम से थोड़ा पीछे जाकर एनडीए के दौर की अगर बात की जाए तो फिर वो समय भारत के अंदर Yamaha के लिए इतना अच्छा नहीं रहा था। 

दरअसल ये वो दौर था जब भारत की टू वीलर इंडस्ट्री ने प्रोग्रेस करना शुरू ही किया था और जापान की कंपनी Yamaha भारत की इस प्रोग्रेसिव इंडस्ट्री में अपने पैर जमाने के लिए स्ट्रगल कर रही थी। 

असल में Yamaha की वर्ल्ड फेमस आड़ी सेफ्टी बाइक्स इंडियन मार्केट में कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई। बेहद मजबूत व कैपेबल होने के बावजूद भी ये बाइक इंडियन मार्केट में बुरी तरह से फेल हो गई थी। 

इस फेलियर ने Yamaha को नए सिरे से सोचने और नई स्ट्रैटेजी बनाने पर मजबूर कर दिया था। Yamaha ने देखा कि उस समय इंडियन मार्केट में सुजुकी एक संगत काफी ज्यादा सफल रही थी जो कि एक हंड्रेड सीसी की लाइटवेट बाइक थी। 

ऐसे में Yamaha ने भी इंडियन मार्केट की डिमांड के अनुसार अपना फोकस हैवी बाइक्स की जगह पर एक हल्के वजन वाली बाइक बनाने पर लगाया। 

अब Yamaha एक ऐसी बाइक बनाना चाहता था जो कि पावरफुल होने के साथ ही दिखने में भी शानदार हो ताकि उस समय के इंडियन यूथ को इसके लुक से लुभाया जा सके और यही वजह थी कि इस बाइक को डिजाइन करने और पूरी तरह से बनाने में कई सालों का समय लग गया था और इस तरह से आखिरकार नवंबर 1985 में Yamaha ने इंडियन मार्केट के अंदर अपनी इस नई बाइक को लॉन्च कर दिया, जिसका नाम Yamaha आर्थिक संकट रखा गया। 

इस बाइक ने लॉन्च होते ही मार्केट में धमाल मचा दिया और आने वाले लगभग 10 सालों तक इसने इंडियन टू वीलर मार्केट को सिंगल हैंडलिंग डोमिनेट किया। 

वैसे सही मायनों में देखें तो आर्थिक संकट का डिजाइन, Yamaha की कुछ दूसरी बाइक्स जैसे आरएस हार्डवेयर, डिलक्स और आरएक्स एस पर बेस्ड था जो कि युवा और युनाइटेड किंगडम जैसे देशों में लॉन्च की गई थी, लेकिन आर्थिक संकट इन दोनों बाइक्स का एक बेहतर अपग्रेडेड वर्जन थी। 

ये बाइक फोर स्पीड गियर और हंड्रेड सीसी के एक सिंगल सिलिंडर दूसरा इंजन के साथ आती थी जो कि 11 बीएचपी की पावर और टन तीनाें एनएम का टॉर्क प्रड्यूस करती थी। 

हवा के पेपर पर यह स्पेक्स बेहद सिम्पल नजर आती थी, लेकिन रियल वर्ल्ड परफॉर्मेंस के मामले में आर1 संडे टेक पावरहाउस थी और इसकी इसी पावरफुल परफॉर्मेंस की वजह से इसका निकनेम भी पॉकेट रॉकेट पड़ गया था। 

असल में जो चीज इस बाइक को इतना ज्यादा खास बनाती थी, वो था इसका पावर टू वेट रेशियो। 

आपको जानकर हैरानी होगी कि ये बाइक इतनी ज्यादा लाइटवेट थी कि इसका कुल वजन सिर्फ 98 किलो था और यही वह मेन वजह थी जो कि टेक्निकल स्पेक्स ज्यादा खास न होने पर भी इसे एक बेहद तेज दौड़ने वाली पावरफुल बाइक बनाती थी। 

दरअसल, Yamaha आर1 संगत जीरो से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार सिर्फ सेवेन फाइव सेकंड में ही पकड़ लेती थी और इस तेज रफ्तार की वजह से ये बाइक ब्लैक रेसर्स के बीच में भी काफी ज्यादा पॉपुलर हो गई थी और इसका इस्तेमाल ब्लैक रेसिंग में भी किया जाने लगा था। 

रेसर से इस बाइक में कई तरह के मॉडिफिकेशन जैसे एक्सपेंशन चैम्बर्स इंजन ट्यूनिंग बड़े वायर्स, बड़े कार्बोरेटर और क्विक थ्रॉटल करके रेस में उतरते थे और दोस्तो जिस समय ये बाइक रेस में दौड़ती थी तो लोग अपनी आखों पर विश्वास ही नहीं कर पाते थे कि यह सिर्फ एक हंड्रेड सीसी बाइक है और इसके तेज स्पीड की वजह से ही लोगों

के बीच में काफी अपवाह भी फैल गई थी कि आरख हंड्रेड मेन हंड्रेड से सी नहीं बल्कि एक बड़ा और पावरफुल इंजन यूज किया गया है और इन सभी अफवाहों और मॉडिफिकेशन की वजह से कई बार रेस अथॉरिटीज को इस बाइक का इंजन खोलकर या श्योर करना पड़ता था कि ये वाकई में हंड्रेड सीसी की बाइक है भी या नहीं। 

अब इस जबरदस्त परफॉर्मेंस के अलावा आर्थिक संकट देखने में भी बेहद शानदार और स्टाइलिश थी। 

जिसके चलते लॉन्च होते ही यह इंडियन यूथ की पहली पसंद बन गई। उस दौर के नौजवान इसके एग्जॉस्ट साउंड के दीवाने हुआ करते थे, जो कि मार्केट के दूसरी सभी बाइक्स से बिल्कुल अलग थी और दोस्तों। 

जिस तरह से आज के समय में रॉयल एनफील्ड बाइक को मर्दानगी का सिम्बल माना जाता है। ठीक वैसे ही लेट एडीशन और नाइंटीज के दौर में आर्थिक संकट भी लोगों के बीच में काफी पॉपुलर थी। 

उस समय हर नौजवान इस बाइक को खरीदने के सपने देखा करता था, लेकिन दुर्भाग्य से बहुत कम लोग ही अपने इस सपने को पूरा कर पाते थे क्योंकि आर्थिक संकट को अफोर्ड कर पाना हरेक के बस की बात नहीं थी। 

दरअसल Yamaha कंपनी ने अपनी इस बाइक को 19 हज़ार ₹764 की कीमत पर लॉन्च किया था। अब आज भले ही यह रकम हमें छोटी नजर आती है, लेकिन इनफ्लेशन को अगर काउंट किया जाए तो उस समय के ये 20,000 आज के करीब ₹1 लाख के बराबर होते हैं। 

अब दोस्तों आज के समय में कोई कंपनी अगर हंड्रेड से बाइक को ₹1 लाख की कीमत में लॉन्च कर दे तो फिर यकीनन उसे कोई नहीं खरीदेगा। लेकिन आर्थिक संकट का जलवा कुछ ऐसा था कि लोग ना सिर्फ इसको खरीदते थे बल्कि इसकी डिलेवरी के लिए कई कई महीनों का वेट भी करते थे। 

इसकी पॉपुलैरिटी इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि उस समय इंडियन फिल्मों में भी सबसे ज्यादा यही बाइक ही नजर आती थी। खासतौर से साउथ इंडियन फिल्म रस्टी में तो इस बाइक को बहुत ही ज्यादा यूज किया गया था और इसीलिए हर दूसरी साउथ मूवी के अंदर यह बाइक दिखाई दे जाती थी। 

इसके अलावा हल्के वजन व तेज रफ्तार की वजह से फिल्म के अंदर स्टंट के लिए भी सबसे ज्यादा इसी बाइक का ही इस्तेमाल किया जाता था और दोस्तो अपने इन्हीं सभी खूबियों के दमपर आर्थिक संकट लोगों की फेवरिट बाइक बन चुकी थी और लॉन्च होने के बहुत कम समय में ही इसे भारतीय रोड्स का राजा माना जाने लगा। 

खैर ये तो हुई आर्थिक संकट से जुड़े सभी पॉजिटिव पॉइंट्स की बात चलिए अब हम इससे जुड़ी हुई। कुछ ऐसी नेगेटिव प्वाइंट्स के बारे में जानते हैं जो कि इस बाइक के पतन का अहम कारण बना। 

अब दोस्तों जैसा कि हमने आपको बताया कि आर्थिक संकट टैक्स फैमली लाइट वेट होना इसके लिए बहुत बड़ा प्लस प्वाइंट था, लेकिन साथ ही यही खूबी इस बाइक के लिए बहुत बड़ा डिसएडवांटेज भी साबित हुआ क्योंकि इसी की वजह से लोग इसे लंबे समय तक तेज रफ्तार से नहीं जला पाते थे। 

दरअसल हल्का होने की वजह से यह बाइक हवा से टकराने पर हिलने लगती थी। साथ ही इसके टायर भी काफी पतले थे जो कि इसे तेज रफ्तार पर पूरी तरह से ग्रिप नहीं दे पाते थे और यही वजह थी कि आर्थिक संकट को तेज रफ्तार से चलाने पर अक्सर लोग ऐक्सिडेंट का शिकार बन जाते थे। 

इसके अलावा इस बाइक का दूसरा सबसे बड़ा नेगेटिव

डियो था कि इसका इस्तेमाल बदमाशों और लुटेरों के द्वारा भी काफी ज्यादा किया जाने लगा था। असल में इस बाइक की साइज और बेहद तेज पिकअप की वजह से क्रिमिनल्स को भागने में बहुत आसानी हुआ करती थी। 

इसीलिए क्राइम करके वो तेजी से नौ दो 11 होने के लिए भी इसी बाइक का ही यूज करने लगे थे और यही वजह है कि जिस तरह आज मारूति ओमनी की छवि एक किडनैपर कार की बनी हुई है, ठीक वैसे ही आर्थिक संकट की छवि भी चोर लुटेरों की बाइक बन गई थी। 

इसके अलावा इस बाइक में कुछ छोटी मोटी टेक्निकल प्रॉब्लम्स भी थी, लेकिन इनमें से एक भी कमी इतनी बड़ी नहीं थी कि इसके प्रॉडक्शन को ही बंद कर दिया जाए। 

ऐसे में Yamaha कंपनी ने 1996 में जब इस बाइक का प्रोडक्शन बंद किया तो फिर लोग पूरी तरह से हैरान रह गए थे। 

लेकिन दोस्तों हकीकत यह है कि कंपनी ने इसका प्रॉडक्शन इसलिए बंद किया था ताकि इसकी कमियों को दूर करके इसका अपग्रेडेड वर्जन मार्केट में उतारा जा सके और फिर आगे चलकर कंपनी ने आरख जी वन थर्टी टू व आर्थिक संबंधों डिफाइन बाइक को इसके अपग्रेडेड वर्जन के रूप में ही लॉन्च किया था, लेकिन जो सफलता आर्थिक संगठन ने हासिल की थी वो सफलता इनमें से एक भी बाइक दोहरा नहीं पाई और दोस्तो। 

इस तरह से जो बाइक कभी इंडियन रोड्स पर राज किया करती थी। 

वह धीरे धीरे समय बीतने के साथ सड़कों से पूरी तरह गायब हो गई और इस बाइक की जगह स्प्लेंडर और पल्सर जैसी दूसरे बाइक्स ने ले ली और दोस्तो आप लोगों को जानकर बेहद हैरानी होगी कि बाइक्स के शौकीनों के बीच में आर्थिक संकट की डिमांड आज भी इतनी ज्यादा

है कि अच्छी तरह से मेनटेन करके रखी गई सेकंड हैंड आर्थिक संगत आज भी एक से डेढ़ लाख रुपये तक आराम से बिक जाती है।


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