MOTIVATIONAL STORY IN HINDI | लोग क्या सोचेंगे ये सोचना बंद करो

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किसी ने बड़े कमाल की बात कही है कि फर्क इससे नहीं पड़ता कि लोग आपको तोड़ना चाहते हैं। फर्क इससे पड़ेगा कि आप क्या चाहते हैं। दोस्तों एक छोटी सी कहानी सुनाता हूं। एक गांव में दो लड़कों की दोस्ती हुई। आठ साल का बच्चा तो एक 10 साल का बच्चा था।

दोस्ती मजबूत होती जा रही थी जब बिरादरी के सादे स्कूल में पढ़ने के लिए साथ में खेलने के लिए जाते थे। एक दिन साथ खेलते खेलते गांव से दूर निकले तो गेंद से खेल रहे थे।

बॉक्स के लेकिन तो बहुत दूर निकल। सुनसान इलाके में पहुंच गए और उनकी जो गिनती वो जाकर की एक पुराने कुएं में गिर गई। उस गांव से बाहर काफी बाहर एक पुराना से कुंआ सूख चुका था जो बड़ौदा बचा था।

10 साल का बच्चा उस निगाह रुको मैं निकलता हूं तो इसी हड़बड़ाहट में जल्दबाजी में वो कुएं में गिर गया। गेंद तो निकली नहीं बल्कि वो भी कुएं में चलाई। छोटा वाला बच्चा जो बाहर खड़ा था उसके हाथ पर पुलिस निगम क्या हुआ।

घरवाले बहुत मारेंगे मौत डांटेंगे और उसकी जान चली जाएगी। ये बच नहीं पाएगा। क्या हुआ? बहुत सारा स्कूल लौटा। सोचने वाला तो बहुत सारे नेगेटिव खयालात होने से बच्चा चिल्लाता बचाओ बचाओ ये बाहर से लड़का चिल्लाता बचाओ और उनकी आवाज सुनते हुए एकदम सुनसान इलाका था।

दूर दूर तक कोई देखने। रथ दौड़ के बच्चों ने आसपास घूम लिया, लेकिन अब पीने के लिए पानी मिले। उसकी सांस फूलने की उसको गले में सूख रहा था। गला आवाज नहीं निकल रही थी, लेकिन सामने अब क्या करें।

तभी उनको दूर झाड़ी के पास में एक रस्सी और बाल्टी दिखाई दी। दौड़ के लिए और लेकर क्या गया। उसने रस्सी से बाल्टी बांधी और बाल्टी नीचे कोई फेंक दी और उस 10 साल के लड़के से केला क्या जो मधुमक्खी सा घृणा करने लगा पागल बाबू तुमने को? तुम नीचे गिर जाओ। ये नहीं हो सकता।

उस चार साल के बच्चे ने कि नहीं मैं करके दिखावा तुम सालों पहले बंटवारा दोबारा जो इस आठ साल के बच्चे ने अपनी पूरी जान लगा दी। उसका गला सूख चुका प्यास लगी।

हालत खराब लेकिन उसके बावजूद उसने उस रस्सी को पूरे दम से खींचा और उस 10 साल के लड़के को बाहर निकाल दिया। इस सारी प्रोसेस में सारे काम रात हो चुकी थी। साढ़े 08:00 बजे शिकायत।

दोनों बच्चे डरते डरते गांव की तरफ जाने लगे। गांव पहुंचे तो चौपाल लगी थी। भीड़ इकट्ठा हो रखी थी। उन दोनों के मम्मी पापा थे। रो रेत गोल करते नहीं बच्चे मिल जाए। बच्चे मिल जाएंगे डोले लेकिन मिल गईं तो सब परेशान थे।

इन दोनों बच्चों को जब गांव में आता देखा तो लोग खुश हो गए कि वह मिल गए। जब दुर्वचन पूछने के काम आए थे। उन बच्चों सोनिया तो क्या बोले? सच बोले, इन मार पड़ी कि तो दूर के चले गए कुंए में गिर गए।

झूठ बोले तो क्या बहाना वाले क्योंकि दिमाग काम करने लगा था, ऐसे हालात थे दिनभर से परेशान तो दोनों सच बोलने लगे। देखिए बड़ा भइया करके दोपहर में इनको मैंने रस्सी से बांध कर लिया और जैसे उसने बोला।

लोग हंसने लगे कि पागल लोग तुम से एक बाल्टी पानी की आदत तुमने 10 साल के लड़के को बाहर निकाल ली। लोग उनका मजाक उड़ाने लगे। तभी गांव के जो सरपंच थे जो सबसे बुजुर्ग व्यक्ति दम लगा के ये सच कह रहे थे कि बच्चा सच के राज ने वाकई में 10 साल के लड़के को बाहर खींच के निगल लिया और इसके दो कारण।

पहली बात तो ये कि इसके पास में चारा नहीं बचा था। वह ऑप्शन नहीं था जिसे मालूम था कि से बाहर निकल नहीं वरना मर जाएगा और दूसरी बात इसके पास में आस पास भी कहने के लिए नहीं था कि तुझसे नहीं होगा।

इसलिए बच्चे सच बोल रहे। जीवन में जब भी आप सक्सेस पाना चाहें तो दो बातें याद रखेगा पहली। कोई ऑप्शन नहीं बचा है। चारा नहीं बचत करके दिखाना है और दूसरी जब आसपास के लोग कुछ कहने लगे कि तुमसे नहीं होगा तो बहरे बन जाना उनकी बातों मत सुनना करके दिखाना यानी वे आधी कहानी से आपसे कहना चाहता।


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