Jaguar Success Story in Hindi History | Tata Motors

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दोस्तों आज मैं बात करने जा रहा हूं। अपनी शानदार क्वॉलिटी और बेस्ट परफॉर्मेंस के लिए दुनिया भर में पहचानी जाने वाली कार जगुआर के बारे में जिसे खरीदना तो पर कार प्रेमी का सपना होता है और साथ ही Jaguar की कार भी शाही लोगों की पहली पसंद है। 

यहां तक कि इंग्लैंड की रानी का भी पसंदीदा कार जब वाणी था तो इस वीडियो में हम जैगुआर कार कंपनी की शुरुआत से लेकर सफलता तक के सफर को जानेंगे और यह भी जानेंगे कि जैगुआर कार कंपनी कैसे दो हज़ार आठ के बाद से भारतीय कंपनी टाटा मोटर्स का हिस्सा बन गई तो उसे कहानी की शुरुआत होती है। 

आज से करीब 96 साल पहले से। जब 1922 में दो मोटर बाइक्स के दीवानों ने साथ मिलकर एक कंपनी बनाई, जिसका नाम उन्होंने सोलो साइड कार कंपनी रखा और यह कंपनी तब कार नहीं बल्कि मोटरसाइकल्स बनाती थी और जिन्होंने यह कंपनी खोला था उनका नाम था विलियम लॉयन्स और विलियम शिवांजलि। 

लेकिन आगे चलकर एक पार्टनर विलियम वान ने भी अपनी हिस्सेदारी बेचने की सोची और इस तरह से उनके शेयर्स को पब्लिक को बेच दिया गया।

जिसके बाद कंपनी का पुनर्गठन हुआ और कंपनी का नाम एसएएस कार्स लिमिटेड कर दिया गया और फिर राजस्व कांत ने स्टैंडर्ड मोटर कंपनी के साथ मिलकर कार्स बनाने की शुरुआत की और ऐसे एस्कार्ट्स लिमिटेड जो कार बनाती थी उसे जैगुआर नाम के साथ लॉन्च करती थी। 

जैसे कि 1935 में जैगुआर मॉडल का पहला कार टू हैंड हाफ रिटर्न इंजन के साथ ऐसा लाइटिंग स्पोर्ट सलून आया और इसी मॉडल से मैच करता हुआ। 

वो पैसे इस स्पोर्ट्स मॉडल थ्री एन हाइवे टेररिजम के साथ ऐसा हंटर लॉन्च किया गया और दोनों जैगुआर अभी तक केवल एसएस कार लिमिटेड कंपनी के कार के मॉडल का नाम था, लेकिन 23 मार्च 1945 को शेयरहोल्डर्स के साथ मीटिंग में इस कंपनी के नाम को बदलकर जैगुआर रखने का फैसला किया गया। 

दरअसल नाम बदलने का कारण यह भी था कि यह सेफ कार्स सुनने में ज्यादा आकर्षक नहीं लगता था और दूसरे वर्ल्ड वार के बाद से इसे नकारात्मक माना जाने लगा था। 

जैगुआर कार्प ने 50 के दशक में शानदार लग्जरी और ताकत से लैस गाड़ियां बनाई, जिसमें जैगुआर की पहली सफल कार हार्ट्स के वन पैटी 1948 में लॉन्च की गई। 

और दो दोस्ताें जैगुआर कार का स्लोगन होता था। ग्रेस स्पेस एंड स्पेस जिसमें ग्रेस का मतलब इसकी जबरजस्त बनावट से था। 

स्पेस यानी इसके अंदर पर्याप्त जगह से लिया गया था और पेस से तात्पर्य इस कार की स्पीड से था और जैगुआर अपने इन्हीं मंत्रा को फॉलो करते हुए अपनी कार को लॉन्च करती रही और यही कंपनी की कामयाबी की सबसे बड़ी वजह बनी टैक्स की वजह बैठक के बाद से जगुआर की एक्सडी वन फोर जीरो और एक्सडी वन जीरो का रही क्योंकि स्पोर्ट्स कार की दुनिया में पूरी तरह से छाई रही और अपने शानदार लुक्स और फीचर के कारण यह लोगों के मन को लुभाने में कामयाब रही थी। 

साथ ही इस कार कंपनी के लिए गौरव का मौका तब आया जब जैगुआर की कार ने पूरा स्टॉफ लेमन रेस जीती और आज के सीरीज की शानदार सफलता के बाद जगुआर ने ई टाइप के कार भी बनाए जो कि लोगों में काफी लोकप्रिय रहे। 

अब तक जैगुआर कार के लिए सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन 1965 में जो स्टील कंपनी जगुआर कार के लिए बॉडी बनाती थी, उसे किसी दूसरी कंपनी ने खरीद लिया और लाया। 

अब जैगुआर कार के फ्यूचर को लेकर चिंता में पड़ गए और साथियों के चिंता का यह भी कारण था कि उनकी उम्र बढती जा रही थी और उनकी कोई संतान भी नहीं थी जो कि उनके कार्यभार को संभाले और इन्हीं सभी बातों से परेशान होकर 1966 में लॉयड ने जैगुआर कंपनी को ब्रिटिश मोटर कारपोरेशन को बेच दिया और 1984 में जैगुआर को ही स्टॉक मार्केट में लिस्ट किया गया। 

लेकिन वहां पर कंपनी अपने आप को ज्यादा समय तक कायम नहीं रख सकी और 1990 में जगुआर को लंदन स्टॉक एक्सचेंज से हटा दिया गया और उसी समय फोर्ड ने जगुआर को खरीदने की इच्छा जताई, लेकिन किसी वजह से यह डील पूरी नहीं हो सकी। 

पर 1999 में जाकर जैगुआर औसतन मार्टिन और वॉल्वो कार की तरह ही फोर्ड का हिस्सा बन गई। लेकिन फोर्ड के लिए जगुआर एक घाटे का सौदा रही और उन्होंने दो हज़ार 8 में जगुआर को लैंड रोवर के साथ में भारतीय कंपनी टाटा मोटर्स को बेच दिया और इस तरह से जैगुआर भारत की कंपनी टाटा मोटर्स का हिस्सा बन गई है। 

दो हज़ार 11 में जगुआर कार के लिए पुणे में एक नया असेंबली प्लांट खोला गया। इसके साथ यह भारत का पहला प्लांट बना जहां पर जैगुआर की गाड़ियां असेंबल की जाती है और दो हज़ार 17 के टैक फेस्टिवल में जगुआर ने अपनी सेल्फ ड्राइविंग गाड़ियां लोगों को दिखाई। 

जगुआर का मानना है कि आगे चलकर सरकारी कारों और बिजली से चलने वाली गाड़ियां ही दुनिया पर राज करेगी और वे इसके लिए पूरी तरह से तैयार है तो दोस्तों अंत में बस मैं यही कहना चाहूंगा कि जैगुआर के सफर में उनके कई मालिक बदलते रहें पर इन सबके बावजूद भी इस कंपनी की गाड़ियों की क्वालिटी में कोई भी कमी नहीं है और जगुआर की गाड़ियां तो हमेशा से पेश रही है।


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